पहाड़ो का नाम सुनते है तो एक अजीब सा अहसास होता है.. आँखों मै एक चमक और चेहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आ जाती है... वो ठंडी ठंडी हवा.. वो पहाड़ी रास्ते... वो खुला आसमान... वो पक्षियों का चेह्चाना वो पेड़ और जंगल.. वो बादलों का आना और पहाड़ो से टकराना वो पानी की बूंदे... वो मिटटी की खुशबु वो सुहाने पल वो कुदरत का नजारा वो खुला सा मौसम.. वो प्रकृति की अदा वो शहर से दूर.. और कुदरत के पास.. वो पहाड़ों का सफर
मेरी एक सोच सी है वो.... जाने वो कहाँ रहती है| कभी कभी ख्यालों मे आती है.. फिर पता नहीं कहां चली जाती है | जब महसूस करता हूँ अच्छा लगता है.. सब अपना और सच्चा लगता है | उसे याद करके समय थम सा जाता है...और मन उसके ख्यालों मे खो जाता है | कभी कभी मन कुछ न बोलकर सिर्फ उसे महसूस करने को करता है | साथ बैठ के समय बिताने का मन करता है | बस ऐसे ही वो बोलती रही और मैं उसे सुनता रहूँ | ऐसे ही जीवन के उन हसीं पालो को उसके साथ जीता रहूँ | पर ये तो मेरी एक सोच है. पता नहीं कहां और कैसी होगी वो | पता नही क्या वो भी यही सोचती है, जो मै सोचता हु | जाने कब मैं उससे मिल पाऊंगा... और अपनी इस सोच को साकार कर पाऊंगा... और न जाने कब मैं अपने दिल की बात उससे कह पाउँगा | तब तक मेरी ये सोच एक सोच ही है | एक सपना है जो मेरे दिल मे ही है |